Geeta Updesh

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ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते।सङ्गात्संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥ अर्थ इस श्लोक का अर्थ है: विषयों (वस्तुओं) के बारे में सोचते रहने से मनुष्य […]

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कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ अर्थ – इस श्लोक का अर्थ है: कर्म पर ही तुम्हारा अधिकार है, लेकिन […]

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परित्राणाय साधूनाम् विनाशाय च दुष्कृताम्।धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे-युगे॥  अर्थ – इस श्लोक का अर्थ है: सज्जन पुरुषों के कल्याण के लिए […]

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हतो वा प्राप्यसि स्वर्गम्, जित्वा वा भोक्ष्यसे महिम्।तस्मात् उत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चय:॥ अर्थ – इस श्लोक का अर्थ है: यदि तुम (अर्जुन) […]

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नैनं छिद्रन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावक: ।न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुत ॥ अर्थ – इस श्लोक का अर्थ है: […]

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यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत:।अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥ अर्थ– इस श्लोक का अर्थ है: हे भारत (अर्जुन), जब-जब धर्म ग्लानि […]

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