न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्‌…

Geeta Updesh

न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्‌ ।
कार्यते ह्यवशः कर्म सर्वः प्रकृतिजैर्गुणैः ॥

अर्थ –

ये निश्चित है कि कोई भी मनुष्य, किसी भी समय में बिना कर्म किये हुए क्षणमात्र भी नहीं रह सकता है | समस्त जीव और मनुष्य समुदाय को प्रकृति द्वारा कर्म करने पर बाध्य किया जाता है|

Rate this post
Share this with friends

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.