शमा परवाने को जलाना…

Shayari

शमा परवाने को जलाना सिखाती है, शाम सूरज को ढलना सिखाती है,मुसाफिर को ठोकरों से होती तो हैं तकलीफ़ें, लेकिन ठोकरें ही एक मुसाफिर को चलना सिखाती हैं !

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