Shayari
Shayari

शमा परवाने को जलाना सिखाती है, शाम सूरज को ढलना सिखाती है,मुसाफिर को ठोकरों से होती तो हैं तकलीफ़ें, लेकिन ठोकरें ही एक मुसाफिर को चलना सिखाती हैं !

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