श्री कृष्ण जी कहते हैं कि हे पार्थ

Geeta Updesh

गतिर्भर्ता प्रभुः साक्षी निवासः शरणं सुहृत्‌ ।
प्रभवः प्रलयः स्थानं निधानं बीजमव्ययम्‌॥

अर्थ –

 श्री कृष्ण जी कहते हैं कि हे पार्थ, इस समस्त संसार में प्राप्त होने योग्य, समस्त जग का स्वामी, सबका पोषण कर्ता, शुभाशुभ को देखने वाला, प्रत्युपकार की चाह किये बिना हित करने वाला, सबकी उत्पत्ति व प्रलय का हेतु,सबका वासस्थान, समस्त निधान और अविनाशी का कारण भी मैं ही हूँ|

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