Geeta Updesh

गुरूनहत्वा हि महानुभवान श्रेयो भोक्तुं भैक्ष्यमपीह लोके |हत्वार्थकामांस्तु गुरुनिहैव भुञ्जीय भोगान्रुधिरप्रदिग्धान् || अर्थ – महाभारत के युद्ध के समय जब अर्जुन के सामने उनके सगे सम्बन्धी और गुरुजन खड़े हो जाते हैं तो अर्जुन दुःखी होकर श्री कृष्ण जी से कहते हैं कि अपने महान गुरुओं को मारकर जीने सेRead Full Quote

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नैनं छिद्रन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावक: ।न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुत ॥ अर्थ – इस श्लोक का अर्थ है: आत्मा को न शस्त्र  काट सकते हैं, न आग उसे जला सकती है। न पानी उसे भिगो सकता है, न हवा उसे सुखा सकती है। (यहां भगवान श्रीकृष्ण ने आत्माRead Full Quote

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यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत:।अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥ अर्थ– इस श्लोक का अर्थ है: हे भारत (अर्जुन), जब-जब धर्म ग्लानि यानी उसका लोप होता है और अधर्म में वृद्धि होती है, तब-तब मैं (श्रीकृष्ण) धर्म के अभ्युत्थान के लिए स्वयम् की रचना करता हूं अर्थात अवतार लेता हूं।Read Full Quote

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आप चतुर होते हुए भी बेढंगे हो सकते हैं | निर्धन होते हुए भी कलात्मक या विशेष हो सकते हैं | कैलेंडर के एक पन्ने को फाड़ देने से आप अच्छे या बुरे नहीं हो जाएंगे | सुबह से लेकर शाम तक का नजरिया ही आपको बनाता या बिगाड़ता हैRead Full Quote

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ठोकर खाकर ही व्यक्ति संभालता है | गिर- कर उठना और फिर भविष्य में संभलकर चलने में ही महानता है | बार – बार ठोकर लगने पर यहाँ न समझना चाहिए की राह विकट है और इस पर तो चलना बेकार है |Read Full Quote

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आशा का दामन कभी न छोड़ें | आशा ही वह ज्योंति है जो आपकी अंधेरी राहों को प्रकाशित करती है | आशा को अपना साथी बनाएं और हर चीज का उज्जवल पक्ष ही देखें | याद रखें, अंधेरा सदैव निराशा को ही आमंत्रण देता है |Read Full Quote

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निराशा का फंदा बेहद सख्त होता है पर ऐसा नहीं कि इससे निकला ही न जा सके | सकारात्मक विचारों को मन में जगह दें, निराशा का फंदा स्वत: ही खुल जाएगा |Read Full Quote

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निरंतर श्रम ही आपकी प्रगति का साथी है | पर ध्यान रहे ! श्रम को सकारात्मक बनाएं विनाशक नहीं | श्रम एक अपराधी भी करता है, पर उसका लक्ष्य किसी को क्षति पहुंचाना या उसके प्राण लेना ही होता है |Read Full Quote

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परिस्थितियों के गुलाम कभी न बने | प्रयास यह करें कि परिस्थितियां आपके नियंत्रण में रहें |  याद रखें , परिस्थितियों  के छत्ते से निकली मधुमक्खियां दुःख के ही डंक मारती हैं |Read Full Quote

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यदि आप को सोचने की लत है, तो ऊँची बात सोचिए, यत्न करना चाहते हैं , तो ऊपर उठने के यत्न कीजिए, दृष्टि उठाते हैं , तो ऊपर को उठनी चाहिए  | सारांश यही है कि आप अपने जीवन का रुख प्रगति की और रखें |Read Full Quote

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यदि कोई युवक अपने शिक्षा – काल में सदाचारी रहकर जीवन व्यतीत कर लेता है तो यह समझ लेना चाहिए की वह जीवन- भर के लिए कुछ बन गया !  उस काल में प्राप्त हुए सिद्धि उसके महान ऐश्वर्य के समान है !Read Full Quote

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एक राष्ट्र को मजबूत और आजाद रखने के लिए कुछ ऐसे बातें, जो हमेसा मौजूद होगी जब तक मूल्यों और चरित्रों को कायण रखा जायेगा, एक राष्ट्र और उसके लोग सदैव जीवित रहेंगे !Read Full Quote

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