Prernadayak

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निरंतर श्रम ही आपकी प्रगति का साथी है | पर ध्यान रहे ! श्रम को सकारात्मक बनाएं विनाशक नहीं | श्रम एक अपराधी भी करता है, पर उसका लक्ष्य किसी को क्षति पहुंचाना या उसके प्राण लेना ही होता है |

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