Prernadayak

Prernadayak

राहत भी अपनों से मिलती है, चाहत भी अपनों से मिलती है |
अपनों से कभी रूठना नहीं क्यूंकि मुस्कराहट भी सिर्फ अपनों से ही मिलता है |

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