Hindi Suvichar

जिंदगी में दो ही लोग असफल होते हैं, एक वो जो सोचते हैं लेकिन करते नहीं, दूसरे वो जो करते हैं पर सोचते नहीं ! Rate this postRead Full Quote

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कोई भी व्यक्ति हमारा मित्र या शत्रु बनके संसार में नहीं आता, हमारा व्यवहार और शब्द ही लोगों को मित्र और शत्रु बनाता हैं ! Rate this postRead Full Quote

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अगर कोई मनुष्य आपको केवल जरूरत पड़ने पर ही याद करता हैं, तो उस बात का बुरा मत मनो क्युकि जब अँधेरा हो जाता हैं तभी दिए की याद आती हैं ! Rate this postRead Full Quote

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ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं| वो हमीं हैं जो अपनी आँखों पर हाँथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अन्धकार है| Rate this postRead Full Quote

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कभी भी दुष्ट लोगों की सक्रियता समाज को बर्वाद नहीं करती, बल्कि हमेशा अच्छे लोगों की निष्क्रियता समाज को बर्बाद करती है| Rate this postRead Full Quote

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संसार एक कड़वा वृक्ष है, इसके दो फल ही अमृत जैसे मीठे होते हैं – एक मधुर वाणी और दूसरी सज्जनों की संगति। Rate this postRead Full Quote

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क्रोध को पाले रखना गर्म कोयले को किसी और पर फेंकने की नीयत से पकडे रहने के सामान है इसमें आप स्वंय ही जलते हैं| Rate this postRead Full Quote

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क्रोध एक प्रचंड अग्नि है, जो मनुष्य इस अग्नि को वश में कर सकता है, वह उसको बुझा देगा | जो मनुष्य अग्नि को वश में नहीं कर सकता, वह स्वंय अपने को जला लेगा | Rate this postRead Full Quote

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आपको अपने भीतर से ही विकास करना होता है। कोई आपको सीखा नहीं सकता, कोई आपको आध्यात्मिक नहीं बना सकता। आपको सिखाने वाला और कोई नहीं, सिर्फ आपकी आत्मा ही है। Rate this postRead Full Quote

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जिन्दगी एक खेल सी प्रतीत होती है, क्योंकि अगर आप इसमें भाग ले रहे हैं और आपको कायदे कानून नही पता तो आप निश्चय ही हारेंगे। Rate this postRead Full Quote

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हमें हमेशा बड़े सपने देखने चाहिए, क्योंकि अगर हम उनको देख सकते हैं, तो हम निश्चय ही उनको पूरा भी कर सकते हैं। Rate this postRead Full Quote

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जब तक मनुष्य के जीवन में सुख-दुख नही आयेगा तब तक मनुष्य को ये एहसास कैसे होगा कि जीवन में क्या सही है और क्या गलत। Rate this postRead Full Quote

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उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत्।आत्मैं ह्यात्मनों बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः ॥ अर्थ –  भगवान कृष्ण जी अर्जुन को बताते हैं कि हे अर्जुन, ये आत्मा ही आत्मा का सबसे प्रिय मित्र है और आत्मा ही आत्मा का परम शत्रु भी है इसलिए आत्मा का उद्धार करना चाहिए, विनाश नहीं| जिस व्यक्ति ने आत्मज्ञान से इसRead Full Quote

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परित्राणाय साधूनाम् विनाशाय च दुष्कृताम्।धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे॥ अर्थ – श्री कृष्ण जी कहते हैं कि हे अर्जुन, साधू और संत पुरुषों की रक्षा के लिये, दुष्कर्मियों के विनाश के लिये और धर्म की स्थापना हेतु मैं युगों युगों से धरती पर जन्म लेता आया हूँ| Rate this postRead Full Quote

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अनाश्रित: कर्मफलम कार्यम कर्म करोति य:।स: संन्यासी च योगी न निरग्निर्ना चाक्रिया:।। अर्थ – श्री कृष्ण जी कहते हैं कि हे अर्जुन, जोभी भी मनुष्य बिना कर्मफल की इच्छा किये हुए कर्म करता है व अपना दायित्व मानकर सत्कर्म करता है वही मनुष्य योगी है और जो मनुष्य सत्कर्म नहींRead Full Quote

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ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते।सङ्गात्संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥ अर्थ इस श्लोक का अर्थ है: विषयों (वस्तुओं) के बारे में सोचते रहने से मनुष्य को उनसे आसक्ति हो जाती है। इससे उनमें कामना यानी इच्छा पैदा होती है और कामनाओं में विघ्न आने से क्रोध की उत्पत्ति होती है। (यहां भगवान श्रीकृष्ण ने विषयासक्तिRead Full Quote

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कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ अर्थ – इस श्लोक का अर्थ है: कर्म पर ही तुम्हारा अधिकार है, लेकिन कर्म के फलों में कभी नहीं… इसलिए कर्म को फल के लिए मत करो और न ही काम करने में तुम्हारी आसक्ति हो। (यह श्रीमद्भवद्गीता के सर्वाधिक महत्वपूर्ण श्लोकों मेंRead Full Quote

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हतो वा प्राप्यसि स्वर्गम्, जित्वा वा भोक्ष्यसे महिम्।तस्मात् उत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चय:॥ अर्थ – इस श्लोक का अर्थ है: यदि तुम (अर्जुन) युद्ध में वीरगति को प्राप्त होते हो तो तुम्हें स्वर्ग मिलेगा और यदि विजयी होते हो तो धरती का सुख को भोगोगे… इसलिए उठो, हे कौन्तेय (अर्जुन), और निश्चय करकेRead Full Quote

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